मौरो प्रोस्परि(Mauro Prosperi) जो चमगादड़ का का खून पीकर रहा जिंदा। Josforup

सहारा रेगिस्तान में होने वाली मैराथन डीसा ब्लेस को दुनिया की सबसे खतरनाक दौड़ माना जाता है 250 किलोमीटर की है दौड़ 6 दिन में पूरी करनी होती है और इसे हर कोई हिम्मत नहीं करता है करने की।
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इटली निवासी पूर्व ओलंपियन पेंटाथिलीट मौरो प्रोस्परि(Mauro Prosperi) ने 1994 में इस दौड़ में हिस्सा लिया. इस दौरान वो रेगिस्तान में खो गए. दस दिन तक वो रेगिस्तान में भटकते रहे।
भोजन और पानी के बिना सहारा रेगिस्तान में मौरो प्रोस्परि(Mauro Prosperi) एक सप्ताह से अधिक जीवित रहे। वह मैराथन दौड़ रहा थे, लेकिन एक सैंडस्टॉर्म के दौरान उसने अपना रास्ता खो दिया। वह लगभग 180 मील गलत दिशा में चला गये। गर्मी के कारण, मौरो केवल सुबह और शाम ही चल सकते थे, और उसने आराम करने के लिए दिन का समय लिया।
उसने एक छोटा सा चैपल पाया, कुछ चमगादड़ों को पकड़ा और उनका खून पीया। प्रोस्परि(Mauro Prosperi) ने भी अपनी नसें काट कर आत्महत्या करने की कोशिश की, लेकिन उनका खून जम गया, और उनकी मृत्यु नहीं हुई।
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जैसा कि हम लोग जानते हैं ऐसी स्थिति में रुकना सही नहीं होता उसे अपने रास्ते पर जारी रखा। 5 दिन बाद, उसे एक छोटा सा नखलिस्तान मिला। 2 दिन बाद, वह कुछ खानाबदोशों द्वारा पाया गया, जिन्होंने उसे अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल पहुंचते समय उसका वजन 17 किलो कम हो चुका था। मौरो प्रोस्परि(Mauro Prosperi) ने बताया कि अस्पताल में 10 दिन के रहने के बाद मैंने अपनी पत्नी को फोन लगाया तो उनकी पत्नी ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार की सारी क्रियाएं कर दी गई थी|
मौरो प्रोस्परि(Mauro Prosperi) ने कहां चार साल बाद एक बार फिर मैं मोरक्को पहुंचा, तो लोगों ने मुझसे पूछा कि आप फिर क्यों आए हैं, तो मैंने कहा, ''जो शुरू किया था. उसे ख़त्म करना है"

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