GK 3 KESNE KYA BANBAYA



. मुगल साम्राज्य का संस्थापक कौन था?
 ►बाबर

. मयूर सिंहासन किसने बनवाया था ?
►-शाहजहां
. मयूर सिंहासन को बनाने वाले कलाकार का क्या नाम था ?
►-बादल खां
. शाहजहां के बचपन का नाम क्या था ?
►-खुर्रम
. शाहजहां की बेगम का क्या नाम था ?
►-मुमताज
. शाहजहां की माता का क्या नाम था ?
►-ताज बीबी बीलकीस मकानी (Taj Bibi Bilqis Makani )
. मुमताज महल के नाम से मशहूर होने से पहले शाहजहां की बेगम को किस नाम से पुकारा जाता था ?
►-अर्जुमंदबानो
. जहांगीर के सबसे छोटे बेटे शहरयार की शादी किसके साथ हुई थी 
►-नूरजहां के पहले पति से उत्पन्न पुत्री से ।
. शाहजहां ने किसकी सहायता से राजगद्दी हासिल की ?
►-असाफ खां
. शाहजहां के समय कौन-सी जगह मुगल के हाथ से निकल गई ?►-कंधार
. शाहजहां ने आगरा से अपनी राजधानी कहां परिवर्तित की ?
►-शाहजहांनाबाद (पुरानी दिल्ली)
. लाल किला और किला-ए-मुबारक का निर्माण किसने करवाया ?
►-शाहजहां
. शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल का मकबरा कहां बनवाया?
►-आगरा
. मुमताज महल के मकबरे को किस नाम से जानते हैं ?
►-ताजमहल
. ताजमहल के निर्माण में कितना समय लगा ?
►-बीस साल
. ताजमहल का निर्माण कार्य कब शुरू किया गया था ?
►-1632 ई. में ।
. ताजमहल के वास्तुविद कौन थे ?
►-उस्ताद ईशा खां और उस्ताद अहमद लाहौरी ।
. ताजमहल को बनाने में इस्तेमाल किया गया संगमरमर कहां से लाया गया था ?
►-मकराना (राजस्थान)
 आगरा का मोती मस्जिद किसने बनवाया ?
►-शाहजहां
 शाहजहां के समय आने वाले फ्रांसीसी का नाम क्या था ?
►-फ्रांसिस बर्नियर और टवर्नियर
. शाहजहां के दरबार में संस्कृत के कौन-से पंडित मौजूद थे ?
►-कबीन्द्र आचार्य सरस्वती और जगन्नाथ पंडित
. कवि जगन्नाथ पंडित ने किसकी रचना की थी ?
►-रसगंगाधर तथा गंगालहरी
. किसने उपनिषदों का अनुवाद फारसी में करवाया था ?
►-दारा शिकोह
. उपनिषदों का फारसी अनुवाद किस नाम से करवाया गया ?
►-सर्र-ए-अकबर!
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Comments

कुछ नया सीखे

Inspiring Thoughts

1.खुशी से संतुष्टि मिलती है
और संतुष्टि से खुशी मिलती है
परन्तु फर्क बहुत बड़ा है
“खुशी” थोड़े समय के लिए
संतुष्टि देती है,
और “संतुष्टि” हमेशा के लिए
खुशी देती है

2.शब्द ही जीवन को
अर्थ दे जाते है,
और,
शब्द ही जीवन में
अनर्थ कर जाते है.

3.पानी को कितना भी गर्म कर लें

पर वह थोड़ी देर बाद अपने मूल स्वभाव में आकर शीतल हो जाता हैं।
इसी प्रकार हम कितने भी क्रोध में, भय में, अशांति में रह लें,
थोड़ी देर बाद बोध में, निर्भयता में और प्रसन्नता में हमें आना ही होगा
क्योंकि यही हमारा मूल स्वभाव है ॥